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उत्तराखंड के काश्तकारों के लिए अच्छी खबर यह है कि भारत सरकार द्वारा भांग के बीज, तेल, नूण एवं चूर्ण अब भारतीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अधीन विक्रय हेतु आवश्यक छूट दे दी गयी है।
अब देशभर मे भाँग दाने के उत्पादक, निर्यातक अपनी पैकिंग पर भाँग दाने को प्रदर्शित कर सकेंगे, हालांकि भाँग के पत्ते के उपयोग पर अभी भी प्रतिबंध जारी रहेगा।

पहले सरकार द्वारा भाँग मे केवल 0.3% THC (terrahydrochloride) की अनुमति थी जिसको बढ़ा कर अब 5% कर दिया गया है, इसके बाद यह माना जा रहा है कि उत्तराखंड के लगभग हर भांग के बीज को मान्यता मिल गयी है।
अब सरकार को अपने प्रयोगशाला में बने बीजो पर निर्भर नही होना पड़ेगा और काश्तकारों को अपने बीच खुद लाने का प्रावधान मिलेगा।


नियमो के अनुसार अब निश्चित मात्रा मे THC तक भारतीय उत्पादक भाँग के चूर्ण का उत्पादन कर सकेंगे जिसके मापदंड नीचे दिये गए मनको के अधीन होगा


इस कानून के आने के बाद उत्तराखंड के अलावा कई हिमालयी राज्यों को फायदा मिलेगा जहाँ इसकी अच्छी खेती हो सकती है मगर सरकार द्वारा लागू प्रतिबंधों के कारण भाँग के बीज का संरक्षण और उत्पादन दोनो ही प्रभावित होते है, इनसे उन निवेशकों को भी फायदा होगा जो भाँग के तेल, बीज एवं चूर्ण के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराते है।

हालांकि इस प्रावधान को लेकर उच्च अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नही है मगर इसके आने से भाँग दाने की कीमत लगातार बढ़ रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले 1 हफ्ते में भाँग दाना की कीमत 50% तक बढ़ गयी है, 14 नवंबर को भाँग दान ₹60/- से ₹80/- प्रति किलो के भाव से बिक रहा था वो अब ₹100/- से ₹120/- तक पहुच गया है।

क्या है भाँग दाने के फायदे?
ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर भाँग दाना हृदय संबंधी रोगियों के लिए रामबाण है, जो लोग मछली के तेल का सेवन नही कर पाते वो इसके तेल का इस्तेमाल करते है, साथ ही इसका तेल पेट और अलसर के कैंसररोधी के रूप मे भी प्रयोग में लाया जाता है।
विकसित देशों में भाँग के रेशो से बने अंडर गारमेंट्स को उन महिलाओं को इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है जो स्तन के कैंसर से जूझ रही है।

इस तरह अब उत्पादों में hemp/भाँग लिखा जा सकेगा


सरकार द्वारा उठाया गया ये कदम कितना उपयोग मे लाया जाता है इसका पता तो आने वाला वक्त ही बताएगा मगर उत्तराखंड के लिए ये खबर आने वालों दिनों में अच्छे दिन ला सकती है।

By Sandeep Pandey

लेखक covid 19 को 8 मार्च 2020 से लगातार कवर कर रहे है और इसपर बारीकी से नज़र बनाये हुए है। इसके साथ ही क्षेत्र की विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और आपराधिक मामलों पर 2015 से लिख रहे है। इसके साथ ही पर्यावरण और उत्तराखंड में रोजगार के विषय पर 2007 से कार्य कर रहे है।

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