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स्पर्श गंगा अभियान द्वारा हिमालय दिवस के अवसर शुरू किए गये “स्वच्छ हिमालय” जन जागरूकता व् स्वच्छता सप्ताह के अंतर्गत आज दिनांक 12/09/2021 को हिमालयन एजूकेशनल एंड रिसर्च डेवलपमेन्ट सोसाईटी ‘हर्ड्स’ के सहयोग से चित्रशीला घाट रानीबाग में साफ़ सफाई का कार्य किया गया। यह कार्यक्रम स्पर्श गंगा अभियान के कुमाऊँ मण्डल संयोजक, डॉ. एस० डी० तिवारी के नेतृत्व में चलाया गया, जिसके अंतर्गत गार्गी नदी के तट पर बिखरे हुए प्लास्टिक, दवाइयाँ, कपड़े एवं अन्य सामग्री को उठाकर थैलों में भरकर एक स्थान पर एकत्र किया गया तथा घाट में आए हुए लोगों को नदी को साफ रखने के लिये जागरूक करने का कार्य किया गया। इस अवसर पर कुमाऊँ विश्वविद्यालय के प्रो० अतुल जोशी द्वारा उपस्थित जनों को हिमालय की स्वच्छता से सम्बंधित शपथ भी दिलाई गई

हिमालय और उसके महत्त्व के बारे में बात करते हुए प्रो० अतुल जोशी ने कहा कि हिमालय को प्राणवायु और जल देने की कारण ही देवता कहा जाता है, क्योंकि हमारे यहाँ देने वाला ही देवता माना जाता है। यदि हिमालय और इसका पर्यावरण नहीं रहेगा तो सम्पूर्ण मानवता ही खतरे में पड़ जाएगी। हमे यह ध्यान रखना होगा कि हिमालय तथा इसका पर्यावरण केवल प्रकृति प्रेमियों अथवा पर्यावरणविदों की चिंता का विषय नहीं है, अपितु इसे सभ्य समाज के प्रत्येक उस व्यक्ति के चिंतन का केंद्र होना चाहिये, जिसे सांस लेने के लिये शुद्ध आक्सीजन तथा पीने के लिये स्वच्छ जल की आवश्यकता एवं महत्व की जानकारी है। अतः प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से समाज के प्रत्येक व्यक्ति से जुड़ा विषय होने के कारण आम जन को भी हिमालय तथा अपने आस पास के पर्यावरण के संरक्षण की ना केवल चिंता करनी होगी बल्कि इस दिशा में सक्रिय होकर कार्य भी करना होगा। और इसकी शुरुआत हमें स्वयं से करते हुए इस बात के प्रयास करने होंगे कि किसी की मृत्यु हो जाने पर उसके कपड़े, दवाईयां अथवा अन्य सामान को यहाँ नदी तट पर ना डालकर उन स्थानों पर डाले जहाँ से नगर निगम अथवा ग्राम पंचायत के कर्मचारी उसे उठा का ले जा सके। इसी प्रकार हमे यह भी संकल्प लेना होगा कि अपने घर, कार्यालय तथा अन्य स्थानों से निकालने वाले कूड़े करकट इत्यादि को हम कभी भी नदी नालों में नहीं फेकेंगे। इस स्वच्छता कार्यक्रम में प्रो० सी० एस० जोशी, श्री के० के० पांडे, डॉ. विनोद जोशी, डॉ. जीवन चंद्र उपाध्याय, डॉ मनोज पांडे, डॉ. सूरज मेहता तथा श्री राकेश शर्मा सहित चित्रशिला घाट पर दाह संस्कार में आए अनेकों व्यक्तियों द्वारा सहयोग किया गया।
 
प्रो. अतुल जोशी

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