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आने वाली 14 जनवरी को मकर संक्रांति स्नान पर्व मेला पुलिस और प्रशासन के लिए कुंभ-2021 की पहली परीक्षा साबित होगा। चूंकि कोविड काल में यह पहला स्नान पर्व है, जिस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। इसलिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने के आसार हैं। हालांकि, स्नान पर्व के लिए ट्रैफिक प्लान और प्रशासनिक व्यवस्थाएं 10 जनवरी तक तय होंगी, अलबत्ता कुंभ मेला पुलिस फिलहाल 15 लाख श्रद्धालुओं के संभावित संख्या को ध्यान में रखते हुए तैयारियों में जुट गई है।

धर्मनगरी में स्नान पर्व और मेलों का सिलसिला साल भर चलता है। मकर संक्रांति स्नान पर्व की गिनती साल के बड़े स्नान पर्वों में होती है। वहीं, कुंभ और अर्द्धकुंभ के दौरान मकर संक्रांति स्नान पर्व का महत्व बढ़ जाता है। इसे कुंभ या अर्द्धकुंभ का पहला स्नान माना जाता है। इस साल 14 जनवरी को होने वाला मकर संक्रांति स्नान पर्व श्रद्धालुओं के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि कोविड काल के बाद कांवड़ मेला, सोमवती अमावस्या, कार्तिक पूर्णिमा जैसे तमाम स्नान पर्वों पर प्रतिबंध रहा है।

मकर संक्रांति स्नान पर्व के लिए कई राज्यों से श्रद्धालु होटल, धर्मशालाओं में ठहरने की व्यवस्थाओं के लिए फोन कर रहे हैं। पूजन और कर्मकांड आदि धार्मिक कार्य संपन्न कराने के लिए श्रद्धालु अपने तीर्थ पुरोहितों से भी संपर्क साध रहे हैं। जिससे यह माना जा रहा है कि मकर संक्रांति स्नान पर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। स्नान पर्व पर सुरक्षा और यातायात की जिम्मेदारी कुंभ मेला पुलिस को सौंपी गई है। इसलिए स्नान पर्व मेला पुलिस और प्रशासन के लिए कुंभ का ट्रायल साबित होगा। कुंभ मेला आइजी संजय गुंज्याल व मेला एसएसपी जन्मेजय प्रभाकर खंडूरी मेला ड्यूटी और ट्रैफिक प्लान को लेकर अधीनस्थों के साथ अलग-अलग बैठकें कर रहे हैं। 

आठ जनवरी को डीजीपी अशोक कुमार भी हरिद्वार पहुंचकर मकर संक्रांति स्नान पर्व और कुंभ की तैयारियों को परखेंगे। आइजी कुंभ संजय गुंज्याल ने बताया कि 10 जनवरी तक मकर संक्रांति स्नान पर्व के जोन, सेक्टर व ट्रैफिक प्लान फाइनल कर दिया जाएगा

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